रंकिणी मंदिर, जादुगोड़ा (Rankini Mandir, Jadugora) यह मंदिर हॉटा–जादुगोड़ा स्टेट हाईवे के किनारे, पोटका ब्लॉक के रोहिणीबेरा गाँव में स्थित है, जो जादुगोड़ा से मात्र ~3 किमी दूर और टाटानगर रेलवे स्टेशन से ~26–35 किमी दूर है । मुख्य देवता रंकिणी मंदिर, जादुगोड़ा :- देवी रंकिणी, जिन्हें स्थानीय आदिवासी परंपरा में “रंकिणी देवी” के नाम से जाना जाता है, को कलि या दुर्गा रूप में पूजा जाता है। मूर्ति एक प्राकृतिक पत्थर (शिला) है, जिसे “जाग्रत” माना जाता है । इतिहास और मान्यता रंकिणी मंदिर, जादुगोड़ा :- मंदिर की स्थापना 1947–50 के बीच हुई थी। -傳説 के अनुसार, दिनबंधु सिंह को स्वप्न में देवी ने प्रकट होकर अपनी मूर्ति (पत्थर) के रूप में पूजा के लिए कह्या । मूर्ति को “जीवित शिला” कहा जाता है—कहते हैं कि उसका आकार धीरे-धीरे बढ़ता रहता है । पुरातन कथाओं के अनुसार, मानव-बलि (नरबली) की प्रथा ब्रिटिशकालीन 1865 में बंद की गई थी । पारंपरिक और सांस्कृतिक पहलू रंकिणी मंदिर, जादुगोड़ा :- प्रमुख पुजारियों में आदिवासी समूह “भुमिज” से संबंध रखते लोग शामिल हैं । देवी र...
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